« »

”चार लाईनें”- २८

2 votes, average: 3.00 out of 52 votes, average: 3.00 out of 52 votes, average: 3.00 out of 52 votes, average: 3.00 out of 52 votes, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry
 हम तो कबके पिघल जाते उनकी बांहों में,,मगर
 उन्होंने कभी कहा ही नहीं कि वो हमारे बिन अकेले हैं…
 अजब गज़ब सी ही है इस इश्क की तासीर जनाब,
 यहाँ तो साहिलों पे भी उठते ज्वार-भाटों के  रेले हैं…!!!!
 
 
 
 
 
 
 
 
 

12 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छी अभिव्यक्ति.
    तभी तो कहते हैं…
    एक में भी तन्हा हम, सौ में भी अकेले हैं….

  2. Vishvnand says:

    बढ़िया अंदाज, अर्थपूर्ण
    प्रयास मनभावन

  3. kalawati says:

    उन्होंने कभी कहा ही नहीं कि वो हमारे बिन अकेले हैं…
    wah kya baat hai , great.

  4. siddha Nath Singh says:

    bhavnaon kee manohar abhivyakti aur kahan ka nirala andaaz.

  5. santosh says:

    वह क्या बात है

Leave a Reply