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तेरे दीदार की बैठे हैं तमन्ना लेकर

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Hindi Poetry
तेरे दीदार की बैठे हैं तमन्ना लेकर
मिल सका तू न अगर क्या करें दुनिया लेकर.
 
बुलबुला सांस का ज्यादा नहीं चलनेवाला,
सिर्फ उतना ही चले आये हैं जितना लेकर.
 
बेखबर कुछ तो खबर पास पडोसी की रख ,
वर्ना जाएगा यहाँ से तू भला क्या लेकर.
 
तुने सूरज को दरीचों से परे रक्खा है,
अब कहाँ जायेगा अन्दर का अँधेरा लेकर.
 
दिल बहलता ही नहीं देखे सुने खेलों से,
अब कहीं और ही चल हमको मेहरबां लेकर. 
 
दमे बाजू भी ज़रूरी है अगर चलना है,
वर्ना किस सिम्त हवा जाय सफीना लेकर.
 
किस क़दर भीड़ में तनहा है शहर वाले सब,
डोलते फिरते हैं रूहों के बियाबां लेकर.

8 Comments

  1. dr.ved vyathit says:

    जितनी चाबी भरी राम ने उतना चले खिलौना
    सुंदर रचना
    हार्दिक बधाई बन्धुवर

  2. Vishvnand says:

    बहुत खूब, अर्थपूर्ण

    जीवन में सारा जो कमाया है रिश्वत लेकर
    सब यहीं छोड़ तू जाएगा पापी कर्म लेकर …

  3. chandan says:

    तुने सूरज को दरीचों से परे रक्खा है,
    अब कहाँ जायेगा अन्दर का अँधेरा लेकर.
    किस क़दर भीड़ में तनहा है शहर वाले सब,
    डोलते फिरते हैं रूहों के बियाबां लेकर.
    बहुत खूबसूरत

  4. Jaspal Kaur says:

    बहुत खूबसूरत रचना. हार्दिक बधाई .

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