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क्यो हर शख्स यहाँ भिखारी है!

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Hindi Poetry

,क्यो हर शख्स यहाँ भिखारी है!

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हर शख्स यहाँ भिखारी है!

Written by rajivsrivastava at

April 16, 2011 (11:28 am

कम मे संतोष क्यो नही?

किसी को काम नहीं करना

मुफ्त का समेटना!

तोह ही दुनिया मह इकोनोमिक आह्काल पढ़ा हैं  

,क्यो हर शख्स यहाँ भिखारी है!

सब को बड़े बड़े वकील बनजना है

सब को सरकारी नौकरी चिहिए

गाँव मह नहीं रहना

खेतो मह मेंहनतो नहीं करना है

ऑफिस मह छाये बेठा गपे मारना है

किसान ही देश की रीढ़ की हड़िया हैं

जब किसान न रहे तो क्या खाओगे ?

भूख मरी होगी लूट मार होगा

चीजो के दाम आसमान पर

किसान ही देश की रीढ़ की हड़िया हैं

जब किसान न रहे तो क्या खाओगे ?

भूख मरी होगी लूट मार होगा

चीजो के दाम आसमान पर

यही हैं भास्ताचार का बीज

जागो देश वासी जागो देश वासी

किसान ही देश की रीढ़ की हड़िया हैं

7 Comments

  1. raman lal raniga says:

    सब को बड़े बड़े वकील बनजना है
    सब को सरकारी नौकरी चिहिए
    गाँव मह नहीं रहना
    खेतो मह मेंहनतो नहीं करना है
    ऑफिस मह छाये बेठा गपे मारना है

  2. raman lal raniga says:

    किसान ही देश की रीढ़ की हड़िया हैं
    जब किसान न रहे तो क्या खाओगे ?
    भूख मरी होगी लूट मार होगा
    चीजो के दाम आसमान पर
    यही हैं भास्ताचार का बीज
    जागो देश वासी जागो देश वासी
    किसान ही देश की रीढ़ की हड़िया हैं

  3. bahut hi saamayik baat kahi hai sir aapne yahan par. umra mein aapse thoda chota hun phir bhi salaah dene ki gustakhi kar raha hun ki agar zara sa presentation aur accha hota to kavita ka ye mahatvapoorna sandesh aur bhi khoobsurati se pahunchta.

  4. Vishvnand says:

    Raman lal raniga ji
    आप राजीव श्रीवास्तवजी की रचना ठीक से पढ़े ही नहीं
    उसका अर्थ जानने की आपमें शायद क्षमता ही नहीं
    इसलिये अनाप शनाप उपदेश करना ही आपकी चाहत दिखी
    किसी रचना पर कमेन्ट करने रचना के नीचे ही जगह है दी हुई
    पर आपको इससे कोई दरकार नहीं
    discipline follow करना आपका धर्म ही नहीं
    भगवान की प्रेम ज्योति आपको ही सही ज्ञान दे
    और discipline न बिगाड़ने की सुबुद्धि दे यही प्रार्थना रही
    और हर शख्स यहाँ भिखारी है यह समझने की भी समझ दे ….

  5. Harish Chandra Lohumi says:

    सादर आग्रह है की कृपया इस मंच की गरिमा बनाए रखने में सहयोग दें . एक वरिष्ठ होने का परिचय दें. पिछले कई दिनों से आपकी रचनाएं पढ़ने का मौक़ा मिल रहा है लेकिन प्रतिक्रया व्यक्त होते-होते रह जाती है.
    कवि बनने से पहले कवि-ह्रदय को विकसित करे. बुरा न मानियेगा क्योंकि वास्तविक कवि सदैव अन्य कवियों और काव्य का हितैषी होता है.

  6. siddha Nath Singh says:

    spelling ki galtiyan aur sapat bayani zayka bigaad rahi hai.

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