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इससे पहले कि अश्क ढल जाएँ

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Hindi Poetry
इससे पहले कि अश्क ढल जाएँ
बज्मे यारां से चल निकल जाएँ.
 
मिन्नतें छोड़ कीजिये कुछ भी, 
कुछ तो हालात ये बदल जाएँ.
 
हम न बरतें जो एहतियात अगर
दांव सब दुश्मनों के चल जाएँ.
 
आप टुक दीजिये करम फरमा,
अपने अरमान भी निकल जाएँ.
 
बज़्म आमादाये समात(1) जो हो,     (1) sunane ke liye udyat
हम भी कह के कोई ग़ज़ल जाएँ.
 
यूँ न आता तो ख्वाब में ही आ,
हम भी कुछ देर को बहल जाएँ.

2 Comments

  1. chandan says:

    हम न बरतें जो एहतियात अगर
    दांव सब दुश्मनों के चल जाएँ.
    यूँ न आता तो ख्वाब में ही आ,
    हम भी कुछ देर को बहल जाएँ.
    बहुत खूब

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