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तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ

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Hindi Poetry

तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ

 

जागा है फिर से  दर्द  दिल में आज,
तुमसे बात करने के बाद,
तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ.

हम चाहते हैं सिर्फ तुम्हीं को,
तेरे ही ख्यालों में रहते हैं,
हम तुम बिन जी नहीं सकते हैं,
तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ.

तेरी आंखों में है कुछ ऐसा नशा ,
हम दिन रात नशे में रहते हैं,
हम तेरे लिए ही जीते हैं,
तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ.

तेरी अदाओं में है कशिश ऐसी,
हम तेरी ओर खींचे चले आते  हैं,
हम तुम पर जान अपनी वारते  हैं,
तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ.

जसपाल कौर    29/6/11   12:45pm

4 Comments

  1. dil se dil tak says:

    तेरी अदाओं में है कशिश ऐसी,
    हम तेरी ओर खींचे चले आते हैं,
    हम तुम पर जान अपनी वारते हैं,
    तुम कहते हो रुक जाओ संभल जाओ.
    आपने पंक्तिया ही ऐसी लिख दी
    मन करता है बस पढ़ते जाओ पढ़ते जाओ
    बहुत अच्छी लगी

  2. sushil sarna says:

    good one-keep it up

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