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उठा के आये हैं तलवार तीरगी वाले. (तीरगीवाले-अन्धेरेवाले)

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Hindi Poetry

उठा के आये हैं तलवार तीरगी वाले.  तीरगीवाले-अन्धेरेवाले

न हार जाएँ कहीं उनसे रौशनी वाले.

 

मैं मुद्दतों से इसी इंतज़ार में मसरूफ,   मसरूफ-मग्न

पलट के आयंगे शायद वो दिन खुशी वाले.

 

वो मौत बाँट रहे हैं नए तरीकों से,

जिन्हें ज़माना समझता था ज़िन्दगी वाले.

 

गया वकारे सुख़न सब क़सीदागोई में, सुख़न-साहित्य,क़सीदागोई-प्रशंसागीत लिखना,vaqaar-pratishtha  

हुनर हुए हैं पशेमान शायरी वाले,  पशेमान-लज्जित

 

तमाम जाम हुए सर्फ़ अव्वलीं सफ़ में    सर्फ़-खर्च,अव्वलीं सफ़-पहली पंक्ति

करें भी सब्र कहाँ तक ये आखिरी वाले.

 

गलत ज़रूर है मीजान आप का वरना,    मीजान-कसौटी

गलत निकलते नहीं लोग सब सही वाले.

 

तवाफ इतने गली के तेरी किये हमने,   तवाफ-चक्कर

भले से जान गए सब हमें गली वाले.

 

कि नाच नाच के बेहाल हो गयी मीरा,

कि अब तो सुन ले सदा उसकी  बांसुरीवाले.

3 Comments

  1. jyoti chauhan says:

    I have made profile here but shows “you dont have sufficient permission to acces this page” how can i publish my poems here jyoti 9999815751

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