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सफ़ेद स्याह को कहना जो सुबहो शाम रहा.

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Hindi Poetry

सद एहतियात से रक्खा ये एहतिमाम रहा         सद एहतियात-सौ जतन से,एहतिमाम-व्यवस्था

गुलाम जो कि फ़क़त आज भी गुलाम रहा .

 

लिहाज कुछ था, लबों तक जो आके लौट गया

यूँ फर्दे जुर्म में मुर्तिब तुम्हारा नाम रहा.               फर्दे जुर्म-अपराध की सूची ,मुर्तिब-लिखा हुआ

 

न हमसे और निभेगी ये अब अदब तहजीब,

सफ़ेद स्याह को कहना जो सुबहो शाम रहा.

 

खुद अपनी पीठ रहे थपथपा बराए फख्र,        बराए फख्र-गर्वपूर्वक

कभी लो पूछ ज़रा खुश भी क्या अवाम रहा.   अवाम-आम जन

 

कहाँ पे फूलों के पौधे उगेंगे सोचा है,

तेरे ज़लाल से पत्थर हो हर मुकाम रहा.     ज़लाल-तेज , क्रोध

 

बस एक लौ ही नज़र आ नहीं रही इसमें,

शमा पे वैसे तो ज़रदोज़ टीम टाम रहा.   ज़रदोज़-स्वर्ण जटित,टीम टाम-सज्जा

 

ज़ुबान खींच के देते है उस्तरे को धार,

चलो कि कुछ तो मेरा आ अब  उनके काम रहा.

One Comment

  1. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे

    जनता जब जोश में आयी सरकार डगमगायी है
    जिनका सिर्फ बातें बना बहाने ढूँढना ही काम रहा ..

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