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कौन अपना कौन पराया

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Hindi Poetry

अपना देश घिरा दुश्मनों से,
कभी दिल कहे ये तो था अपना ,
कभी दिल कहे ये तो है पराया,
भीड़ पर कर विस्फोट बनता आतंकवादी,
राजनेताओं ने खा -खा पैसे कर दी देश की बर्बादी,
बहुत मुश्किल हुई ये घड़ी,
अब तो अपने घर में भी लगता है डर,
कैसे कटेगा जिंदगी का तन्हा सफ़र,
आह कौन है जिस पर करें हम यकीं,
जब माली ही तोड़ने लगे बागबाँ से फूल,
तो घरों में भी रिश्तों की गर्माहट जाओ भूल.

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत खूब सत्य कथन, दुखद और प्रभावी
    रचना के लिए commends

    हैं सब ये अपने ही चुनाव जीत बने पराये
    पैसे से जीता चुनाव रिश्वत ले अब लगे कमाने
    फिक्र नहीं कुछ देश की लोग मरे आतंक से
    खुद को ही बस बचा रहे पोलिस बंदोबस्त से …
    इनके पास न धर्म है ना है कोई ज्ञान
    राजनीति करते करते जायेंगे शमशान

  2. Narayan Singh Chouhan says:

    सत्य का सामना कराती रचना …….

  3. renukakkar says:

    very truly depicted

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