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बारिश के बाद…….

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Sep 2011 Contest
 

बारिश के बाद थमे सारे परनाले

उखडी थीं सड़कें, उफने थे नदी-नाले

वृक्ष हंस रहे  थे,हिल-मिल कर ठिठोली कर रहे थे

इन्द्रधनुष के रंग मन को मोहित  कर रहे थे

 

गलियों  में बच्चे नांव ले निकले

कुछ बच गए, कुछ गिरे फिसले

नुक्कड़ पर खड़े प्रेमी-युगल एक दूजे को निहार रहे थे

प्रेम-रस के आस्वादन की बेला सजा रहे थे

 

चिड़ियों  ने चहककर मधुर स्वर घोला

रंगीन तितलियों ने मौसम में रंग घोला

पुष्पों  ने खुश हो बगीचा महकाया

मिटटी की सोंधी  खुशबू ने मन था बहकाया

 

चहुँ ओर दिशाएं आनंदित हो रही थीं

काली घटायें शांत हो आराम से सो रही थीं

धीरे-धीरे तारे टिमटिमाने  लगे थे

मेघों में छिपे चन्द्र देव धीरे से मुस्कुराने  लगे थे

 

कुछ था जो अधूरा था

मन विचलित  और संदेह पूरा था

मूसलाधार बारिश ने तन खूब  भिगाया

गर्मी की  तपन में ठिठुरन का अहसास दिलाया

 

शरीर  ने भीग एक चेतना जगाई

नयनों ने सपने देख दिल में आग लगायी

सपनों को संजोया, टूटने पर पलकें भिगायीं

हाय! दुर्भाग्य बारिश की बूंदे मन को ना भिगा  पायीं

आपसी होड़ की इस आग को छू भी  न पायीं

 

हर  बरस बारिश बस यूँ ही आती जाती है

तन को धो मन को अछूता छोड़ जाती  है

 

काश इस बारिश में ऐसा दम  होता

हर बार भीगकर हमारा  द्वेष  कम होता

हम हँसते-हँसाते  और सारे गम भूल जाते

एकजुट हो एकता की ध्वजा लहराते

 

मनुष्य गर्व के साथ कहता,

मैं आज बारिश में नहा कर आया हूँ

सारी ईर्षा,कटुता, मतभेद भुलाकर आया हूँ

सारे जहाँ की ताकत कितना भी जोर लगा ले

मैं अपनी एक नयी दुनिया बसाकर आया हूँ

 

 

 

 

 

9 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना और मीठी अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति
    बहुत मन भायी

    वर्षा का दोष नहीं, वो तो बेचारी बहुत कोशिश करती है
    पृथ्वी और सब प्राणियों को नवजीवन देकर जाती है
    पर मानव ही है जो उत्साह पाकर निष्ठुर होता जाता है
    वर्षा की कोशिश और सीख से कुछ नहीं सीख पाता है
    अंतर्मन को धोता नही कलुषित ही रखता है ……

    • nitin_shukla14 says:

      @Vishvnand,
      हाँ सर पूर्णतया सत्य है
      धन्यवाद इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए

  2. rajivsrivastava says:

    baarish ke paani ke saath— jeewan ki ek dukhdayi rang ka mel hai is rachna main–kash baarish ka paani is katu rang ko dho paata to jeewan sukhmai ho jata—- ek prabhavi rachna –badahai

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    वाह क्या बात है नितिन जी !
    बरखा विगत शरद ऋतु आयी !
    हार्दिक बधाई !

  4. siddha Nath Singh says:

    achchha varnan.varsha ka.

  5. pallawi says:

    bohut bhai sir!!

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