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बावफ़ा तन्हाई !!!

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Hindi Poetry

कहीं फिर चला न जाये कोई मुझे मेरे साथ छोड़कर,
इस डर में सीने से लगा रखी है बावफ़ा तन्हाई हमने |
माज़ूर ये दिल कहीं और लगे भी तो भला कैसे लगे,
अभी पार ही कहाँ पाई है उस इश्क की गहराई हमने |

अब कुछ भी हो किसी पहलू की चाह कभी करूंगा नहीं,
है कितनी ही दफ़ा ये बात अपने दिल से कहलाई हमने |

लोगों की तेज़ नज़रों में तो हमारी ज़ीस्त में सिर्फ बहारें हैं,
उन्हें क्या ख़बर कितनी बारिश इन आँखों से बरसाई हमने |

आज अपने हर एक नए शेर में कहीं कुछ क़हत सी खटकती है,
हर वो शायरी भी अब सवाली है जो उनके लिए थी फ़रमाई हमने |

इस दिल का तो एक ही काम है ताज़ा हसरतें पैदा करना,
न जाने कितनी तो इसी दिल में ज़िन्दा ही दफनाई हमने |

एक आलम था जब कानों से मौसीक़ी कभी दूर नहीं जा पाती थी,
काशीदगी हो गयी साज़ों से जो सुनी उनके लिए बजी शहनाई हमने |

उनकी रुख्सत से समझा मुहब्बत में क़ुसूर सर लिए जाते हैं,
देर ही सही तबसे हर ख़ता की वजह ख़ुद पर ही ठहराई हमने |

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3 Comments

  1. nitin_shukla14 says:

    “इस दिल का तो एक ही काम है ताज़ा हसरतें पैदा करना,
    न जाने कितनी तो इसी दिल में ज़िन्दा ही दफनाई हमने |”

    बहुत खूब बयां किया है दिले नासूर को ऋषभ जी, बधाई स्वीकारें

    कुछ कहने को उत्सुक हूँ –

    कहते थे बेवफा हम हैं
    बहुत खूब वफ़ा निभाई तुमने
    हम तो झलक देख लिया करते थे
    इश्क की आग लगायी तुमने

    अब दीवाने हो जब गलियों में फिरा करते हैं
    दीदार तो दूर है हर नज़र है चुरायी तुमने
    हसरतें तो बहुत थीं,तुम्हे आगोश में लेने की
    जाने क्यूँ रुखसत हो, दी ग़में जुदाई तुमने

  2. Vishvnand says:

    बहुत खूब
    बड़ी खूबसूरत है नज़्म, पढ़कर दिल को सुनाई हमने …..
    हार्दिक बधाई

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