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–// राजनीति ही दागदार नजर आती है //–

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Hindi Poetry

महत्वकांक्षाए जब ग़दर करती है /
सहमी सहमी सी सरकार नजर आती है /
देखकर लहरों के बिगड़े तेवर ,
मल्लाह को मझधार नजर आती है /
बनायी कितनी सिधान्तो की पैनी तलवार ,
चलने को होता है तो धार नजर आती है /
जीत जाते है कितने ही चुनाव मगर ,
दिल न जीत पाते है तो हार नजर आती है /
वेशभूषा है उज्वल ,चरित्र मटमैला,
अब तो राजनीति ही दागदार नजर आती है /
कुर्सी करवाती है झगडे ,बाँटती है दिलो को ,
कोई भी पार्टी इसकी ना हक़दार नजर आती है //

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत अच्छी
    अर्थपूर्ण मनभावन रचना
    बधाई

    रिश्वतखोरी और घोटाले दिन प्रति दिन नए
    कैसी संस्कृति की ये अपनी सरकार नज़र आती है ….

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