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रावण दहन

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Hindi Poetry

“सदियाँ गुज़री रावण जलते

रावन फिर भी न जल पाया

राम ने था, जो पथ दिखलाया

क्या कोई उस पर  है चल पाया?

हर बरस यह रावण,

बस यूँही जलता जायेगा,

असली दहन तो तब ही होगा,

जब मन का रावण मर जायेगा

लहराएगी तब ध्वजा शिखर  पर

श्री राम नाम गूंजेगा तब

फिर न कोई रावण होगा

रामराज्य  बस जायेगा

    “जय श्री राम”

12 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    जब तक छल है स्वर्णमृगों का रावण मरना मुश्किल है .
    सीता राम युँही बिछुड़ेंगे, अभी सुधरना मुश्किल है.

  2. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर प्रभावी और
    अर्थपूर्ण रचना .
    बहुत मन भायी
    हार्दिक बधाई i.

    धर्मनिरपेक्षता का मतलब अधर्म नहीं होता ..
    जबतक राजनीतिज्ञ अधर्म से चलते रावणराज्य ही ये रहता
    देश में रामराज्य लाने ऎसी वृतियों के खिलाफ तीव्र जन आन्दोलन ही एकमात्र शस्त्र रह जाता …..

  3. Narayan Singh Chouhan says:

    सटीक रचना ,
    बधाई /

  4. rajivsrivastava says:

    kaash log aisa samajh pate— us din Raavan sachmuch mar jayega—bahut prabhavi rachna,AAp ki ek aur damdaar rachna ka intezaar hai

  5. vijesh bhute says:

    bahut hee sundar rachna hai ye 🙂

  6. Harish Chandra Lohumi says:

    लगता है रावण की नाभि के अलावा कहीं और भी अमृत विद्यमान था,
    जो कि भ्राता विभीषण से भी गुप्त रखा गया था.

    बहुत अच्छी, संदेशप्रद और आवाहन करती रचना के लिए बधाई के पात्र हैं आप, नितिन जी !!!

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