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उनसे क्यूँ होती अदावत कोई.

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Hindi Poetry

उनसे क्यूँ होती अदावत कोई.

जब कभी थी न रिफाक़त कोई.

 

कान देता न ज़रा भी जालिम,

क्या करे उससे शिकायत कोई.

 

खार के साथ खिले हैं क्यों गुल,

देख सुन के करे सुहबत कोई.

 

हो रहे हैं वो मेहरबां हम पर,

आने वाली है मुसीबत कोई.

 

एक अरसे से तने तनहा हूँ,

 काश आ जाये तेरा ख़त कोई.

 

मुड के एक बार नहीं देखा फिर,

यूँ भी होता कहीं रुखसत कोई.

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Bahut khuub….

    “हो रहे हैं वो मेहरबां हम पर,
    आने वाली है मुसीबत कोई.”
    जन लोकपाल को बदलने की
    गधे लिख रहे है ऐसे ख़त कोई …

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