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“आधुनिकता VS संस्कृति”

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Hindi Poetry

एक दिन ऐसा आएगा लड़की का नाम Twitter
और लड़के का Facebook रक्खा जायेगा
हर गली के नुक्कड़ पर गूगल प्रथम, दितीय
और तृतीय का उदघोष सुनाई दे जायेगा ।


स्कूल में बच्चों की हाजिरी SMS से ही लग जाएगी
और टीचर अक्सर ही उनको 3G पर पढ़ाएगी
हर एक सही जवाब पर Like का Sign दिखाएगी
गलत जवाब जो अगर दिया तो Facebook पर मुर्गा बनाएगी ।


दूधवाला, अखबार वाला, माली, और सब्जीवाला हर पल का Status बतलायेगा
और कामवाली अपनी छुट्टी की अर्जी Twitter पर भिजवायेगी ।


किसी के घर में शादी होगी वोह Event में दिख जाएगी
जो-जो Dishes बनी होंगी वोह Facebook पर Post हो जाएँगी ।
गिफ्ट जो मन से देना होगा वोह Snapdeal पर बुक हो जायेंगे
और स्नेह स्वरुप भेंट की गयी राशि Online Transfer हो जाएगी  ।


भगवान के दर्शन Google पर होंगे, भक्तगण ऑनलाइन प्रसाद चढ़ाएंगे
भीड़ बहुत होगी Net पर तब, प्रति व्यक्ति पार्किंग का चार्ज लगायेंगे ।


Actor /Actresses फिल्म Promotion पर सबके घर-घर जायेंगे
Movie Release से एक दिन पहले मोबाइल पर Reminder भिजवायेंगे ।


दूल्हा-दुल्हन शादी करके लन्दन-पेरिस न जायेंगे,
Internet Booking का लाभ उठाकर चाँद पर हनीमून मनाएंगे ।
इस व्यक्तिगत मिलन के बेला का भी Status Update मिल जायेगा
उनके घर आने से पहले छोटा Yahoo घर आ जायेगा ।


आधुनिकता की दौड़ में काम आसान ज़रूर हो जायेंगे
मुझे आशा है फिर भी दोस्त , दोस्तों को भुला न पायेंगे ।
रिश्ते तब भी मधुर रहेंगे , यूँही न मिटने पायेंगे
जीवन के हर सुख-दुःख में अपनों की याद दिलाएंगे ।


माँ बच्चे के गिरने पर, पुचकार के गले लगाएगी
और बेटी की विदाई पर ऑंखें सबकी भर आएँगी ।
भाई-बहन का प्यार महज़ राखी न दर्शाएगी
ममतामयी ह्रदय से माँ हरदम ही जानी जाएगी ।


लाख बहाने हों जीने के,लाख विदेशी कोशिश हो ,
यह हिन्दुस्तान है मित्रों, यहाँ की संस्कृति कभी न मिट पायेगी ।

6 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    sundar archna

  2. Vishvnand says:

    वाह वाह हार्दिक खुशी से बधाई
    बढ़िया वैचारिक अर्थपूर्ण कल्पना की रचना और विस्तार
    Technological progress का सदुपयोग करना ही है स्वीकार
    और इस सदुपयोग के लिए अपनी उच्च संस्कृति और मूल्यों का लेना है आधार
    वरना technoloical progress का बढ़ता रहेगा दुरूपयोग जो ही आजकल की है हमारी असली हार

    • nitin_shukla14 says:

      @Vishvnand, आपकी इस खूबसूरत प्रतिक्रिया का मैं तहे दिल से आभारी हूँ सर, आपकी सलाह सोलह आने सत्य है , दोनों के बीच एक संतुलन बनाना बहुत ही आवश्यक है
      और हाँ मैं सोचता हूँ की रचना का शीर्षक भी “तकनीकी विकास VS संस्कृति” होना चाहिए , क्या कहते हैं सर?

  3. suresh dangi says:

    आधुनिकता व् संस्कृति की सुन्दर यात्रा. बधाई स्वीकार करें .

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