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आदमी गुमशुदा हो गए.

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Hindi Poetry
आईने  बेवफा हो गए
या हमीं क्या से क्या हो गए.
 
दोस्ती की न उम्मीद रख
आज कल वो खुदा हो गए.
 
ली मशीनों ने उनकी जगह 
आदमी गुमशुदा हो गए. 
 
उसने समझी वक़त कुछ नहीं,
जिसकी खातिर फना हो गए.    वक़त-महत्व,फना-बलिदान  
 
बात अपनी ज़माने से थी
आप क्यूँ मुब्तिला हो गए.  मुब्तिला-शामिल,संलग्न
 
ख़्वाब थे रोशनी के मगर
धीरे धीरे धुंआ हो गए. 
 
एक बार उसने देखा नहीं
हम फ़िदा सौ दफा हो गए. 
 
जिसकी दीवारों पर नाम सौ,
हम पुराना किला हो गए. 
 
देखते सबने तौबा करी,
हम थे कडवी दवा हो गए.  

6 Comments

  1. MAHENDRA VISHWAKARMA says:

    अच्छी रचना है, हृदय की गहराई नज़र आती है,

  2. ली मशीनों ने उनकी जगह
    आदमी गुमशुदा हो गए.
    रचना का ह्रदय भाव भाया

  3. H.C.Lohumi says:

    दोस्ती की न उम्मीद रख
    आज कल वो खुदा हो गए.

    वाह ! बहुत खूब सिंह साहब !

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