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इतिहास वर्ष

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Hindi Poetry

इतिहास वर्ष

आओ जीवन संघर्ष सजाएँ हम
एक नया इतिहास वर्ष मनाएं हम

मही मेरी मातृ वत्सला
क्यों इसने लावा उगला
आकाश अमीय बरसाने वाला
द्रुमदल शांति छलकाने वाला
क्यों अब गोले बरसाता है
प्राण घातक शोले टपकाता है
चारों और बबंडर धूल धूवां
चैन अमन क्यों चूर हुआ
धड़ धड़ निरंतर गिरती लाशें
बिलखती उखड़ती टूटती सांसें
किसने कातिल करदी केशर क्यारी
हुई कलंकित वादियाँ हमारी

क्योंकर शांति उत्कर्ष मनाये हम
आओ जीवन संघर्ष सजाएँ हम
एक नया इतिहास वर्ष मनाएं हम

अब वक्त नहीं शांति कपोत उड़ाने का
कफ़न के कपड़ों से श्वेत ध्वज लहराने का
जब जब जो जो हाथ बढे अपने गिरेबानों पर
हमने उनको काट दिया है खेल के अपने प्राणों पर
शरणागत शांति दूत हित
हम शिवी बन जाया करते हैं
देकर निज अंग दान अस्थि मज्जा और प्राण
दधिची भी कहलाया करते हैं

हमने उनको समझा कर देख लिया
निति मर्यादा के त्राणों से
पर लातों के भूत कहाँ माने हैं
विधि सम्मत उलाहनो से
भुजंग ने कभी विष छोड़ा नहीं
चन्दन से लिपटाने से भी
काँटों ने कंटकता तजी नहीं
सुमन सामीप्य पाने पर भी
विष दंशित तर्जनी रक्षा हेतु, निज प्राण गंवाना ठीक नहीं
जब शांति शिथिलता हो जाये,उसे सहलाना ठीक नहीं
जब भाई ही कुलघातक हो जाये,उसे गले लगाना ठीक नहीं
अयुद्ध यदि कायरता कहलाये,उसे अपनाना ठीक नहीं

हे जन गण नायक,राष्ट्र विनायक
हे मातृ उपासक ,विधि विधायक
अब बस अनन्तविजय का साज सुने
कल नहीं बस आज सुने
कल नहीं बस आज सुने I

तो उत्सव सहर्ष मनाएं हम
आओ जीवन संघर्ष सजाएँ हम
एक नया इतिहास वर्ष मनाएं हम

डॉ मनोज भारत

2 Comments

  1. santosh bhauwala says:

    आओ एक नया इतिहास वर्ष मनाये हम सब मिल कर!! अति उत्तम !!!

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