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ॠतु गीत ..शीत सर्द हवाएँ

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Hindi Poetry

ॠतु गीत ..शीत

सर्द हवाएँ

अबकी बार,बहुत दिन बीते
लौटी सर्द हवाओं को ।
लौटी सर्द हवाओं को ।

काँप गई थी ,धूँप
चाँदनी कितनी शीतल थी
नदियाँ गाढी हुई
हवाएँ बेहद विचलित थी।

व्यर्थ हुये आलाव
आँच के धीमे होने से
फसलें ठिठुरी और फुगनियाँ
सहमी ..सहमी सी ।

अबकी बार बहुत दिन सहते
रहे विवाई पावों की।

अबकी बार बहुत दिन बीते
लौटी सर्द हवाओं को।
लौटी सर्द हवाओं को।
कमलेश कुमार दीवान
८ जनवरी ९५

2 Comments

  1. dr.ved vyathit says:

    सुंदर गेय रचना कथ्य व् शिल्प दोनों दृष्टि से उत्तम है बधाई

  2. Vishvnand says:

    सुन्दर मधुर गीत
    मन भाया

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