« »

कल क्या हो

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

जलवायु परिवर्तन एक सामान्य प्रक्रिया है ।भू वैज्ञानिक इतिहास मे पृथ्वी
पर भोगोलिक परिस्थितियाँ बदलती रहीं हैं । परिवर्तन प्रकृति का नियम भी
है ,फिर जलवायु मे होने वाले बदलाव की भयावह तस्वीर क्यों पेश की जा रही है।
हमे आशाओं का सृजन करना होगा।स्वरचित गीत सादर समर्पित है……..

कल क्या हो

हम उड़े गगन मे उतना ही
जितना पंखों से भार सहे

कोई मुझसे पूछे कल क्या हो ?
मै कहता हूँ ,संसार रहे ।

हम रहे न रहे फिर भी तो
घूमेगी दुनियाँ ,इसी तरह
चमकेगा आसमान सारा
नदियाँ उमड़ेंगी उसी तरह
ये सात समुंदर बचे रहे
कोई द्वीप न डूबे सागर मे
सब कुछ बिगड़े पर थोड़ा सा
जल बचा रहे इस गाघर मे
सब कुछ तो खत्म नहीं होता
जो बचा आपसी प्यार रहे
कोई मुझसे पूछे कल क्या हो
मै कहता हूँ ,संसार रहे ।

संसार की आबादियों को ये पक्तियाँ सादर समर्पित है।अपनी
आवश्यकता न्यूनतम हो।मनुष्य मे जलवायु के परिवर्तनशील
तत्वों से अनुकूलन करने की क्षमताये हैं,आधुनिक वैज्ञानिक
ईजादों ने उसे बढ़ाया है,भयभीत न हों ।

कमलेश कुमार दीवान

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना
    अर्थपूर्ण और आशाजनक
    प्रशंसनीय

    जैसी करनी फल पायेंगे
    सत्कर्म हमें बचायेंगे
    दुष्कर्म विनाश ही लायेंगे
    सृष्टि को ना कुछ फर्क पड़े
    मानव जाति खुद भुगतेंगे

  2. Siddha Nath Singh says:

    arthpoorn aur sandeshvaahika rachna.

  3. Jaspal Kaur says:

    बहुत अच्छी रचना. मनभाई.

Leave a Reply