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सिमटती दूरियाँ

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Hindi Poetry

नए-नए रास्तों पर चल निकले
नयी-नयी भावनाएं पनपती गयीं
अनजान देश
अनजान शहर
अनजान रास्ते
अनजान चेहरे
उनमें अपना सा कोई नज़र न आया
भीड़ में खुद को बिलकुल तन्हा पाया|

चेहरा तो कोई भी जाना-पहचाना न था
पर मुस्कुराकर जब कुछ सोचा
तो कोई भी अनजाना न था
मुस्कुराहटें जब वापिस मिलती चली गयीं
तब अपनों-बेगानों की दूरी मिटती गयी
फिर क्या देश, क्या परदेस
दूरियाँ सब सिमटती गयीं|

4 Comments

  1. Kusum Gokarn says:

    Very finely put thought about a smile going miles in making friendship with unfamiliar strangers in any corner of the world.
    Kusum

  2. Vishvnand says:

    बड़ी सुन्दर अर्थपूर्ण मनमोहक रचना
    हार्दिक बधाई

    ऐसी मुस्कराहट चेहरे पर यूं ही नही खिलती जो परिणामकारक होती है
    अन्दर ह्रदय में बसे सुन्दर भावनाओं और विचारों के जरिये उभरती है
    जो वातावरण को प्यारा बना, रिश्तों और अजनबियों में नजदीकी लाती है

  3. parminder says:

    This was a personal experience, odd and a lonely feeling in a new country, but, the warmth and support received was amazing!

  4. sushil sarna says:

    एक अर्थपूर्ण रचना-श्री वी.आनंद जी की प्रतिक्रिया से मैं सहमत हूँ-मुस्कराहट का मतलब दिल में इक दूजे के लिए अपनापन होना-ठीक ही तो कहा है कि बाकी दियां गलां छड़ो दिल साफ़ होना चाईदा है – बधाई

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