« »

तुम मुझसे क्यूं छुपे हो ?

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Uncategorized

तुम मुझसे क्यूं छुपे हो ?
मेरी नींद उड़ गयी है ,होशोहवास खो बैठी हूँ
उसकी ज़रुरत भी क्या है अगर तुम नहीं हो?
सुनो उस मैना को जो बिलखता गीत गा रही है
देखो वो सूखे पत्तो को जो बसंत का इंतज़ार कर रहे हैं
देखो उस रोती नदी को जो सागर से मिलने को तड़प रही है
और वो मधुमखी जो सेहरा में गुम गयी है …अपने प्रेमी से बिछड़ कर
सभी मेरा ही तो तराना गा रहें हैं

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत खूब अति सुन्दर अभिव्यक्ति
    चित्र के साथ इन पंक्तियों की छबि
    मन भिगो गयी… हार्दिक बधाई

  2. U.M.Sahai says:

    विरह का सुंदर चित्रण, रेनू जी. बधाई.

  3. parminder says:

    आपके चित्र भी आपकी कविता से भावपूर्ण हैं| विरह की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति|

Leave a Reply