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ये उदासी

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लफ़्ज़ों में बयां हो पाए न
आँखों से पर बह जाये हाँ
दिल में रहती है हरदम
बैचैन सी ये उलझन
और उदासी
सुनता हूँ मैं  तेरी सदा
नज़र आती मुझे तू हर जगह
तुझमें मैं हूँ हर घडी
और मुझमें
ये उदासी
खींच लो जो सारा लहू
फिर भी दिल से न निकलेगी तू
दिल में रहती है धड़कन
और धड़कन में
ये उदासी

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर अभिव्यक्ति
    बहुत मन भायी
    क्यूँ उदासी हमने अपने mood का default mode बनाया हुआ है
    इस पर विचार की जरूरत है, क्या ये अपने सुख को बढाता है ?

  2. Aditya ! says:

    उदासी आई है तो जायेगी भी. बस इतनी सी बात है.

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