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घर बैठे ही ….! (भक्तिगीत)

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Hindi Poetry, Podcast
नाम साधना की अनुभूति में उभरा हुआ मेरा यह  इक पुराना भक्तिगीत इसके नए पॉडकास्ट में गाकर प्रस्तुत करने में बहुत खुशी है
यह  गीत पंकज उधास जी की गायी सुन्दर ग़ज़ल ” दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है ” की ही तर्ज़ पर उसके विपरीत अलग अर्थ लिए  उभरी थी और उसी तर्ज़ में पॉडकास्ट में गायी है
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घर बैठे ही ….! (भक्तिगीत)
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घर बैठे ही जप चिंतन में मन जब रमता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है ……!
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दुनिया भर की उलझन सारीं, सुलझी लगतीं हैं,
अंतर्मन मे सत्संगत का मेला रंगता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है …….!

स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाता, चिंतन, साधक को,
सतगुण का आनंद जहाँ, सतज्ञान से मिलता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है …….!

कैसे किसको हम समझायें, जप चिंतन महिमा,
बिन कुछ मांगे, सब सुख पाया, ऐसा लगता है,
प्रभु चरणों मे खुश हो मनवा यूं ही गाता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है ..…….!.

घर बैठे ही जप चिंतन में मन जब रमता है,
चिंतामुक्त हुआ ये जीवन, ऐसा लगता है………!

 ” विश्वनन्द “

7 Comments

  1. Dr. Manoj Bharat says:

    भक्ति भाव की प्रचलित धुनों से बिलकुल अलग , हरी किर्तन-सत्संग के लिए उपयोगी भक्ति गीत.
    सादर
    साधुवाद.

    • Vishvnand says:

      @Dr. Manoj Bharat ,
      आपकी प्रतिक्रिया और प्रशंसा ने आनद दे प्रोत्साहित किया है
      आपका तहे दिल से शुक्रिया है

  2. dr.o.p.billore says:

    जप जिंतन की महिमा का उत्तम वर्णन |श्रेष्ठ भक्ति रचना |बधाई |

    • Vishvnand says:

      @dr.o.p.billore ,
      आपकी प्रतिक्रिया दिल खुश कर गयी
      आपको हार्दिक धन्यवाद

  3. kanchana says:

    Soul Touching as ever,what else to say,like how the feel of -what cant be expressed- cannot be said as in the lyrics.The accompaniment animates the rendition and takes it to a higher level.The song communicates to the soul direct.

    • Vishvnand says:

      @kanchana ,
      Thank you immensely. I am delighted to receive & am in admiration from within of such a profound comment and commendation from you on this Bhakti geet ..
      We in general and I in particular are greatly missing your profound presence with you poems and comments at p4poetry for quite some time now and hope & earnestly look forward to your visit to site more often now onwards…

  4. Sushil Joshi says:

    वाह….. अद्भुत……… शब्दविहीन हो गया हूँ इसे सुनकर…… सर आपकी समस्त रचनाएँ सीधे दिल में प्रवेश करती हैं….. लेकिन यह शायद मेरा ही दुर्भाग्य है जो अनेक बार समय की कमी के कारण आपको टिप्पणी देने में असमर्थ रहता हूँ यद्दपि मुझ जैसे तुकबंदी करने वाले व्यक्ति की आपकी रचनाओं पर टिप्पणी करना सूर्य को दिया दिखाने वाली बात होती है…..

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