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विनती

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Hindi Poetry
 

The lines are mostly from Guru Gobind Singh’s Gurbani “Chaupai Saheb”
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हम हैं, तुम्हरी शरण, तुम्हरी शरण मेरे गिरिधर
हम हैं, तुम्हरी शरण, तुम्हरी शरण मेरे गिरिधर|

हमरी करो हाथ दे रक्षा
हाथ राखो पूरण करो इच्छा
प्रभु चर्नन में ध्यान लगायो
भव सागर तब पार लगायो|

हम हैं, तुम्हरी शरण, तुम्हरी शरण मेरे गिरिधर
हम हैं, तुम्हरी शरण, तुम्हरी शरण मेरे गिरिधर|

हमारे दुष्ट सभै तुम घावौ
आप हाथ दे मोहे बचावौ
सुखी बसे मोरो परिवारा
सेवक सा नम्र रखो करतारा||

हम हैं, तुम्हरी शरण, तुम्हरी शरण मेरे गिरिधर
हम हैं, तुम्हरी शरण, तुम्हरी शरण मेरे गिरिधर|

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    बिनती पढ़ और podcast सुन प्रार्थना और भक्तिभाव का अनूप सुकूँ आया
    वरदान मधुर स्वरों का बहुत मीठा और दिल से उभरा है ये अंतर्मन जाना
    अति सुन्दर ….
    सुरमयी पोस्ट को हार्दिक वन्दना

  2. dr.o.p.billore says:

    अति सुन्दर भक्ति रचना , भाव पूर्ण अभिव्यक्ति बधाई |

  3. parminder says:

    विश्व जी और डाक्टर साहिब, आपका तहे दिल से शुक्रिया! कुछ भी असमंजस हो, मैं इसी चौपाई साहेब का पाठ कर हौंसला लेती हूँ!

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