« »

हम लोग तो पसंद करते हैं, ऐसी टूटी-फूटी सड़कों को

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

कुछ करते क्यूँ नहीं

ठीक करवाते क्यूँ नहीं

इन टूटी-फूटी सड़कों को

कितने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं

चलने में कितनी दिक्कत होती है

गाड़ियां अलग टूटती हैं

कहा शर्मा जी ने

अपने इंजीनिअर  दोस्त से.

तभी बोल उठा

पास बैठा

उनका जवान बेटा

नहीं अंकल,

सड़कों को कतई

ठीक नहीं करवाईयेगा

कर-दाता के पैसे यूँ ही

व्यर्थ नहीं बहाइयेगा

कुछ तो हम जवां पीढ़ी पर

भी रहम खाइएगा

हम लोग तो बल्कि पसंद करते हैं

ऐसी टूटी-फूटी , गड्ढों वाली सड़कों को

जाते हैं जब हम

मोटर-साइकल पर

गर्ल-फ्रेंड को पीछे बिठा कर

लम्बी सैर पर.

 

 

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    व्यंग तो भाया बहुत
    मगर इसमें भी है इक तथ्य बड़ा
    सड़क और गढृढों का ये रिश्ता
    सालों से चलता आया
    सड़कछाप contractors से ये
    सड़कें बुरी बनवाते हैं
    मंत्री अफसर contractor से
    भ्रष्ट मलाई खाते हैं
    नाम इसीसे है ये इनका
    “सड़कछाप” कहलाते हैं

  2. Siddha Nath Singh says:

    every dark night has a silver lining,is’nt this true.

Leave a Reply