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आरज़ू

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Hindi Poetry

लबलाबाई आँखें किस उम्मीद से तक रहीं थी उसकी ओर
कहीं बहुत पीछे, कितने ही परदों के पार
हसरतें कुलबुलाकर बाहर आने को थीं आतुर
आँसू अटका हुआ आँखों की छोर पर
गिरा नहीं, वहीं से पीछे को हो लिया
गिरते ही कहीं गालों की वो तपती गर्मी
पानी से भाप बना उड़ा न दे उसको
फिर कैसे बयाँ होगा दर्द उसका
दिखेगा किसको फिर दोज़ख उसका
कुछ शब्द जो जुबां तक आने को थे संकुचित
एक नज़र उनसे भी ज़्यादा बता गयीं कहानियां संकलित|

पर नज़रों की भाषा पढ़ सके
ऐसा दिल भी तो चाहिए,
इक नज़र से ही जो भर दे सब घाव
ऐसी मुस्कराहट भी तो चाहिए!

11 Comments

  1. rajendra sharma "vivek" says:

    Aadhunik kavita ki anivaaryataao
    ko purn karate huye sahaj rup se pragat anubhootiyaa

  2. Dr. Manoj Bharat says:

    सुंदर अभिव्यक्ति कौशल ..

  3. chandan says:

    पर नज़रों की भाषा पढ़ सके
    ऐसा दिल भी तो चाहिए,
    इक नज़र से ही जो भर दे सब घाव
    ऐसी मुस्कराहट भी तो चाहिए!

  4. chandan says:

    बहुत खून परमिंदर जी

  5. chandan says:

    गुस्ताख़ी के लिये मुआफ़ी चाहता हूँ दोनो बार कमेंट देने में गल्ती हुई है
    आपकी अभिव्यक्‍ति बेहद खूब सुरत है

  6. Kusum Gokarn says:

    Second stanza is very meaningful.
    A smile can go a mile in healing a sorrowful heart.
    Kusum

  7. sushil sarna says:

    लजवाब क्या कहने-अद्भुत अभिव्यक्ति -परमिन्द्र जी हार्दिक बधाई

  8. Hi Parminder
    Beautiful depiction of the heart in pain . The second stanza comes like sunshine to brighten up . Beautiful! liked the lines
    ‘पर नज़रों की भाषा पढ़ सके
    ऐसा दिल भी तो चाहिए,
    इक नज़र से ही जो भर दे सब घाव
    ऐसी मुस्कराहट भी तो चाहिए!
    sarala.

  9. Vishvnand says:

    Very very elegant & emotive poem indeed
    Am totally in sync with Sarala’s beautiful comment on the poem
    Hearty Kudos, Liked immensely

  10. parminder says:

    आप सब की सराहना और मेरी हौंसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया!
    देखा है बहुत से मजबूरों को, शब्द अटक कर रह जाते हैं, पर आँखें कहाँ chupaa paatee hain n dard?

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