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मिठास का घूँट ले कर तो देरव

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Hindi Poetry
“मन में कडुवाहट ले कर कोई क्यूं जीए
रवुद कुशी है ये कोई अपना रवून क्यूं पीये
मिठास का घूँट ले कर तो देरव ,अमृत का काम करेगी
तू दुनिया के लिए मरे ना मरे ,वो तुझ पे मरेगी”

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह बहुत खूब
    और यह मिठास भी ऐसी विशाल हो कि ऎसी वैसी कडुवाहट भी इसमें मिठास बन जाए

  2. dr.o.p.billore says:

    बिलकुल ठीक कहा आपने | संत शिरोमणि कबीरदास जी की वाणी भी यही कहती है :-. कागा काको धन हरै कोयल काको देत
    मीठा शब्द सुनाय के, जग अपनी करि लेत.

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