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पूंजी सहारा बूढों की, ,ना बाँटना इसको

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Hindi Poetry

बाँट दी पूंजी सभी पछता रही हैं वो
लुटाके अपना सब कुछ दुःख पा रही हैं जो
कोसती हैं उस घडी को , उसने क्यु किया ऐसा
दुश्मनी की जड़ बना,जालिम यही पैसा

ना थी ये दौलत , बेटों में अदावत भी ना थी
प्यार था माहौल में,ये बग़ावत भी ना थी
पच्चीस साल संग संग रहे ,धन ने जुदा किया
खुद लड़े सो लड़े, बेरहम इन्सान ये , माँ को विदा किया

बुढिया का अनुभव सुनो ,बतला रही सबको
पूंजी सहारा बूढों की, ,ना बाँटना इसको

पूंजी अगर हो पास में ,संकट घडी ना जाएगी
फिक्र इसकी क्यूँ करो
मर जाओगे जिस दिन कभी , औलाद में,बंट जाएगी

5 Comments

  1. s.n.singh says:

    baaghbaan film kee kahani chand lafzon me bataani.

  2. Vishvnand says:

    अच्छी समझदारी की रचना
    मन भायी
    पर इस बारे में मेरे ख्याल कुछ अलग हैं
    माँ बाप के खुद के जीवन जीने का और पैसे के प्रति जैसा नज़रिया रहता
    उनके बच्चे काफी हद तक अपने जीवन में वैसा ही नज़रिया हैं अपनाते
    इसलिए अच्छे माँ बाप के बच्चे भी अक्सर अच्छे ही उपजते
    वैसे प्यार और सावधानी से जीना तो हर उम्र की आवश्यक गरज रहती…

    • C K Goswami says:

      @Vishvnand, मैंने अपने रिश्तेदारों में भी कई ऐसे लोग देखे हैं जिन्होंने पुत्र मोह में अपनी पूंजी ,यहाँ तक मकान भी अपने बच्छों के बीच बाँट दिए और आज ये देखा गया की वो बेघर होकर बेटियों के घर रह रहे हैं .बेटों को उनकी कोई परवाह नहीं.

  3. dr.o.p.billore says:

    मानवीय रिश्तों में आ रहे भावनात्मक विघटन और मिथ्या अहम् की हो रही बेतहाशा वृद्धि ही ऐसी परिस्थितिय्तियों की जनक होती है | फिर भी रिश्ते अमूल्य होते हैं | सुन्दर रचना | बधाई |
    और हाँ पूरे चौदह महीनों का अज्ञात वास पूर्ण कर अब आगमन हुआ है आपका | बहुत बहुत स्वागत है |

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