« »

रंग यादों के

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

सफ़र में ज़िंदगी के मिले तमाम लोग चलते-चलते
कोई एक मील कोई चार चला, कोई रोते कोई हँसते
धूमिल हुईं बहुत सी यादें, हल्की सी बस टीस दिल में
पर कुछ हैं जो बस ही गयी हैं भीतर तक मेरे अंतर्मन में|

भूलूँ तो, पर जाती कहाँ हैं ये स्मृति पट से खंडित हो
लिपटी हुई मेरी साँसों के हर तार से जैसे पतंग की डोर हो
कमबख्त जायेंगी तभी जब जान पृथक होगी शरीर से
अभी तो मन के कैनवास पर बौछार हो रंगों की जैसे|

6 Comments

  1. sushil sarna says:

    bahut sundr rachna Parminder jee-yaadon kee sundr byaanee-liked it very much

  2. siddha nath singh says:

    sundar rachna.

  3. dr.o.p.billore says:

    जो मिट जाये वो याद ही क्या

  4. dr.o.p.billore says:

    जो मिट जाए वो याद ही क्या |
    जो हटाई जा सके स्मृति पटल से वह याद कहाँ |याद हमारे वश में नहीं, याद तो बस यादों के नीचे दबती जाती है और धूमिल होती जाती है जिसके कभी भी उभर आने की पूरी संभावना रहती है |
    याद को लेकर रची गई सुन्दर रचना | बधाई |

  5. Dr. Paliwal says:

    बहुत सुन्दर रचना है….बहुत कुछ याद दिला गई……

  6. parminder says:

    सुशील जी, सिद्ध जी, डा. बिलोर और डा. पालीवाल आप सब की सराहना का बहुत बहुत आभार|

Leave a Reply