« »

तुम मेरे पास रहो ऐसी जहाँ तक दुनिया होए ख़तम ….! ( गीत)

3 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry, Podcast

 तुम मेरे पास रहो ऐसी जहाँ तक दुनिया होए ख़तम  ….! ( गीत)

तेरी इन भोली आँखों में मै अपने को खोऊं कितना,
तेरे इन मीठे होटों से पीऊँ भी और अब कितना,
कि अब तक भरा नहीं मन ये, न होती प्यास भी कुछ कम,
तुम मेरे पास रहो ऐसी जहाँ तक दुनिया होए ख़तम ….. !

“तेरा ये हाये!  मुसकाना, यूं हँसना और शरमाना
न तेरे हुस्न से बढकर नशे का कोई मयखाना,
उड़ गए होश अब मेरे, हुआ है नशा अभी ना कम,
तुम मेरे पास रहो ऐसी, जहाँ तक दुनिया होए ख़तम …. !

तेरी इन बाँहों को पाकर, लगे सब स्वर्ग सा मुझको,
सिमट आयीं मेरी बाँहों में तुम, वरदान हो मुझको,
तेरी जुल्फों को, गालों को, इन होटों को सराहें हम,
तुम मेरे पास रहो ऐसी, जहाँ तक दुनिया होए ख़तम…… !

तेरी इन भोली आँखों में मै अपने को खोऊं कितना,
तेरे इन मीठे होटों से पीऊँ भी और अब कितना,
कि अब तक भरा नहीं मन ये, न होती प्यास भी कुछ कम,
तुम मेरे पास रहो ऐसी जहाँ तक दुनिया होए ख़तम ….!.

 ” विश्व नन्द “

 

7 Comments

  1. dr.o.p.billore says:

    प्रगाड़ प्रेम को प्रकट करती प्यारीसी रचना | विरह और श्रृंगार दोनों ही विधाओं में उच्च कोटि की प्रस्तुतियां | बधाई |

  2. Vishvnand says:

    dr.o.p.billore ji
    इस मनभावन प्रोत्साहनपर प्रतिकिया का है हार्दिक आभार
    ऐसी प्रतिक्रियाएं दे जातीं मन को सार्थकता का आनंद अपार
    बहुत बहुत धन्यवाद

  3. amit478874 says:

    आज बहुत दिनों बाद एक आवाज़ सुनी.. प्यार, दर्द और एक ममता का मुझे एहसास हुआ..! वाकई दिल को छु गया आप का यह गीत, सर…! कभी मुझे अपने आप से शिकायत होती है कि मै क्यों नहीं लिख पाता आप की तरह…? फिर दिलासा देते हुए कहता हु, “विश्वाश रख, विश्वनंदजी (सरजी) का आशीर्वाद है तुम्हारे पास..!” आज तक आपकी कविताये हमें छूती थी और आज आप कि शक्शियत हमारे दिल को छू गयी…! आप को मेरा प्रणाम..! आप के चरण स्पर्श को स्वीकार करे…! 🙂

  4. Vikash says:

    5 star from me. 🙂

  5. Vishvnand says:

    Vikash
    The value of this motivation from you is immense for me . It rejuvenates me and will keep me so for a long time now.
    How do I thank you?

  6. Vishvnand says:

    Amit ji
    आपकी विदित भावनाओं और प्रशंसा का मैं कैसे शुक्रिया अदा करूँ समझ नही आता पर आप अपने कमेंट्स से मुझे बहुत प्रसन्न और कार्यरत रखते हैं ये सत्य है …..

  7. विश्वानन्द जी
    सुन्दर गीत मधुर आवाज के .एल .सहगल साब की याद दिलाती है

Leave a Reply