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फांसी की सजा मांग कर क्यूँ अपराधी को बचा रहे हो

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Hindi Poetry

फांसी की सजा मांग कर क्यूँ अपराधी को बचा रहे हो

उच्च,सर्वोच्च न्यायलय में अपील का हक क्यूँ दिलवा रहे हो
इसके बाद भी राष्ट्रपति से जीवन दान की भीख  मांगने का उसे अधिकार है
बलात्कारी को ऐसा मौका दें तो हमें धिक्कार है
ऐसे अपराधियों को समलैंगिको  के बीच छोड़ दो
अरबी शेखों की और इनका मुह मोड़ दो
फिर पता चलेगा इन्हें,जबरदस्ती क्या होती है
किस तरह अबला दर्द से  चिल्ला चिल्ला के  रोती  है
छोडो इन्हें शिकारी कुत्तों के बीच
मांस के लोथड़े बना डालेंगे इनके बदन से खींच
तब उन्हें याद आएगी किसी अबला की चीख
मांगेंगे अपने पापों से मुक्ति की भीख
पर ये सब यहाँ नहीं होगा क्यूंकि भारत महान है
औरत यहाँ उपभोग की वस्तु  है और देश पुरुष प्रधान है
पर अब ये  लम्बे समय तक नहीं चलेगा
नारी जागृत हुयी है ,कोई कानून भी बनेगा
माँ बहन बेटी के बारे में अब पुरुष भी सोचने लगा है
कैसे करें रिश्तों की रक्षा हर कोई सोचने  लगा है
मानवाधिकार के नाम पर अब बलात्कारियों को  बक्शा  नहीं जायेगा
जो जैसा करेगा ,वो वैसा ही फल पायेगा
नपुंसक बनाके ,अपराधी को ज़िंदगी भर एहसास कराया जायेगा
औरत को ऐश समझनेवालों को ,ज़िंदगी भर रुलाया जायेगा
ज़बरदस्ती करनेवाले अब ज़मानत दे कर भी न  छूट  पाएंगे
किसी अबला की इज्ज़त वो जब चाहे ,न लूट पाएंगे

 

One Comment

  1. kshipra786 says:

    एक एक शब्द में सच है पर सजा मिलेगी तब बात बने .

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