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हिन्दोस्तां मेरा वापस ला दो

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Hindi Poetry

बदलते वक़्त में शायद तुम

इतने मतलबी हो गए हो

इतिहास के पन्नों में दुबक कर

आराम से जो सो गए हो

उठो भगत, सुभाष उठो ..

पटेल, तिलक तुम भी जागो

जाने कहाँ पर खो गया वो …

हिन्दोस्तां मेरा वापस ला दो

थक गए बहुत ये माना

है आराम जरुरी भी

या तो खुद आ जाओ वरना

अपने जैसा हमें बना दो

जाने कहाँ पर खो गया वो …

हिन्दोस्तां मेरा वापस ला दो

बलिदान तुम्हारा हम सब भूले

आज़ादी के मद में चूर

विलासता में जकड़े हुए हैं

जंजीरों से मुक्त करा दो

जाने कहाँ पर खो गया वो …

हिन्दोस्तां मेरा वापस ला दो

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर भावनिक और देशप्रेम से प्रेरित
    रचना प्रभावी और समवेदना की बहुत मन भायी
    हार्दिक बधाई

  2. dr.o.p.billore says:

    राष्ट्रीयता से ओतप्रोत एवेम अत्यंत भावपूर्ण रचना | बधाई |

  3. anil dhakre says:

    बढे चलो बढे चलो
    Naveen तुम बढे चलो

  4. parminder says:

    बहुत सुन्दर देश प्रेम की रचना! काश, पुराने वक्त की मान्यताएं आज भी होतीं|

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