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***मांग सिंदूर से सजन भर देना ……***

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Anthology 2013 Entries, Uncategorized

बिंदिया, लाली, चूड़ी, मेहंदी

लगा के सब श्रृंगार किया

मधु पलों की बरखा वाले

हाथों को स्वीकार किया

नैन झुका के नैन मिलाये

मौन मिलन का इकरार किया

तुम मेरे हो और मेरे स्वप्न हो

बस मैंने स्वप्न से प्यार किया

न मैं जानूं न तुम जानो

प्रणय रास क्या होता है

जन्म जन्म के इस बंधन में

हर क्षण मधुमास सा होता है

इक दूजे में खो जाने को

मन आतुर हर दम रहता है

भुजबंध में बस सिमटे सिमटे

मन चुप चुप कुछ कुछ कहता है

रंग मेहंदी का हो न फीका

इस प्यार का ऐसा रंग देना

रहे सांस जब तक इस तन में

बस, मांग सिंदूर से सजन भर देना, मांग सिंदूर से सजन भर देना ……

सुशील सरना/24.04.13

2 Comments

  1. Mahender Singh Nayak says:

    sunder vichar

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