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***उस माँ से मिला दे मुझे ……***

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….इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे ……

 

वक्त तेरे दामन . को  मोतियों से भरूँ 

इक बार बीते लम्हों से मिला दे मुझे 

थक गया हूँ बहुत ..बिछुड़ के जिससे

इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे 

 

…………………….इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे 

 

पंथ के शूलों से हैं रक्त रंजित ये पाँव 

नहीं दूर तलक कोई ममता का गाँव 

अश्रु अपनी हथेली पे ले लेती थी जो 

उस आँचल की छाँव में छुपा दे मुझे 

 

…………………….इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे 

…………………….इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे 

 

मेरी अकथ व्यथा को पढ़ लेती थी ..जो 

मेरी साँसों में तृप्ति सी भर देती थी ..जो 

मेरे पाषाण पलों को मोम करती थी जो 

हिम गंगा सी वो मूरत ….दिखा दे मुझे 

 

…………………….इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे 

…………………….इक बार आ उस माँ से मिला दे मुझे 

 

सुशील सरना/3.03.2013

 

4 Comments

  1. s n singh says:

    ati sundar aur bhavbheeni kavita, bahut khoob.

  2. Vishvnand says:

    Kavitaa ye dilsparshi pyaari vishay par sundar badii hai
    padh ise man me ubharatii Maan prati bhaavnaaon kii ladii hai

    sundar rachanaa ke liye hardik badhaaii

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