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अनछुई यादे

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

खूबसूरत थे वो पल
जो प्यारी बाते किया करते थे

खूबसूरत थी वो मुस्कराहट
जब हम 8:30 class entry लिया करते थे

खूबसूरत है वो दिल
जो किसी के रोने पर उसे समभाल लिया करते थे

खूबसूरत है वो जज्बात
जो CS CD का एहसास करते थे …

खूबसूरत है वो teachers के बोरिंग lectures
जो हर पल हमे पकाते थे
खूबसूरत है वो हाथ
जो Assignment बना कर दूसरो को कापी करने को देते थे
औरमुस्किल वक़्त मे हमारा हाथ लेते थे

खूबसूरत है वो क्लास
जिसे खुदा ने खुब्सुरती अद्दा की

और खुश्नसीब है हम जिसे
आप लोगो ने दोस्ती से नवाजा

आँखों में सपने और दिल में अरमान लिये,
एक सफ़र में चल पड़े बिना किसी का साथ लिये,
रास्ते में कुछ नये चेहरों से मुलाकात हो गई,
फिर तो वो ऐसे दोस्त बने जैसे एक रिश्ता हो उम्र भर के लिये.
वो लम्हें जो मुझे चाहने वाले मेरे दोस्त दे गये,
वो लम्हें जो ना भूला पाने वाले कुछ लोग दे गये.
इस सफ़र की शुरुआत हमने साथ की थी,
जान से प्यारे यारों के साथ कितनी सारी बात की थी,
ज़िंदगी के उन पलों को भी हमने साथ जिया था,
जिन पलों ने खुशी और गम दोनो से मुलाकात की थी.
वो लम्हें जो अब लौट के नहीं आ सकते,
वो लम्हें जहाँ हम चाह के भी नहीं जा सकते.
अपने यारों के दिल की बात हम बिना कहे जान लेते थे,
कौन पसंद है किसको ये थोड़े से झगड़े के बाद हम मान लेते थे,
Sharna treat और कैफ़े की पार्टियां तो रोज़ हुआ करती थी,
वो लम्हें जो एक धुंधली याद बन गये,
वो लम्हें जो एक यादगार किताब बन गये.
कॉलेज आने का मन नहीं फिर भी कॉलेज आया करते थे,
techfest par कुछ लोगों को boyfriends और बाकियों को events बलाया करते थे,
एग्जाम देने की तो जैसे आदत सी हो गई थी,
फिर रिज़ल्ट देख के कुछ रोते तो कुछ मुस्कुराया करते थे.
अजीब थे ये लम्हें जिसमें हम हँसे भी और रोये भी,
अजीब थे ये लम्हें जिसमें कुछ पाये भी और कुछ खोये भी.
इन लम्हों को एक याद बना के अपने साथ ले जाऊगी,
इन लम्हों की दास्तान फिर किसे सुनाऊगी , क्योंकि…….
क्या इन लम्हों को मैं फिर से जी पाऊगी? क्या ऐसे माहौल में मैं फिर से वापस आ पाऊगी?
मैं जानती हूँ इसका जवाब तो ना ही होगा,
क्योंकि लिखी हुई किताब को मैं फिर से कोरा कैसे कर पाऊगी.
बस इन लम्हों को अपने दिल मे बसा लूगी.
और जब याद आयेगी आप सबकी तो नम आँखो के साथ मुस्कुरा लूगी

भुल से भी कोई भुल हुइ हो तो
भुल सम्झ्कर् मफ कर् ना
ये लिखा है आपकी नादान Prerna ने
इसे हम।र। thank you कहऩे क। अद।ज समझना

23 Comments

  1. swarnim says:

    heart touching poem loved it!

  2. prerna says:

    thanku swarnim…:)

  3. sachin says:

    +nice lines+……lyk it….(y)

  4. nayna says:

    <3 <3

  5. shainan dhakad says:

    awsm 🙂

  6. Swikriti says:

    Lovely… Heart touching… 🙂

  7. Tripti Rawat says:

    Jus luv ur poems n u 2 babe….

  8. Akanksha says:

    Cnt be betr described, these 4 yrs of engineering, clg life,hostel life n frends fr life.. no wrds 2 describe..simply gr8 🙂

  9. Lekhi says:

    lovely it is!! 🙂 🙂

  10. yashika says:

    nice…… loved it…!!!

  11. sneha says:

    awesome as always… 🙂

  12. Narayan Singh Chouhan says:

    bhut khub

  13. Priyam says:

    amazing..:)

  14. urnita says:

    Awesome job prerna… 🙂

  15. surbhi says:

    awesome :):)

  16. s n singh says:

    shabdon ki spellings sudhar len, bhavna me bahte hue shabd sambhavat: vigalit ho gaye hain!

  17. prerna singh says:

    Thanku SN sir…for correction but sometimes feelings are more important then spelling of words and in my opinion an poem which comes to bottom of your heart has touches to your heart , and i think my poem had reached to all students who are passing this phase today tomorrow and future.:)

  18. prerna singh says:

    thanku everyone..!!

  19. Vishvnand says:

    Please review your motivation & idea of why you post & share here your poems.
    Is it only to receive from friends flattering comments for whatever your have written & posted
    Or also to know from other distinguished members (who read posted poems here), how your poem is fairing as a poem
    In a good poem conveying of feelings is important but equally important & no less is correctness of language & grammar and accordingly a poem gets rated too in the opinion of knowledgeable readers.
    Your poem does not measure up to the latter requirement which you must give importance to if your desire is to improve in poetry writing skills.
    Your reply to comment of Mr SN Singh therefore does not reflect the desired attitude or understanding a poet must rightly have and is also written in incorrect English full of grammatical & other mistakes.
    This of course is my personal opinion on reading your fairly beautiful poem and your response to Mr SN Singh’s comment.

  20. poorva says:

    awesum as always 🙂

  21. Sanjeevani says:

    Lovely poem! thoughtful…

  22. Tiji says:

    Awesome:)

  23. Geeta says:

    lovely poem….. 🙂 🙂 🙂

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