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हक़ का हरदम सवाल करता है

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Hindi Poetry

हक़ का हरदम सवाल करता है

तू भी बेज़ा बवाल करता है

 

शहर में रह के आदमी ही रहा,

तू निहायत क़माल करता है

 

ख़त कहाँ अब कहाँ के नामाबर,

अब तो वो मिस्ड कॉल करता है

 

शर्म से सिर्फ पानी पानी है,

खून वरना उबाल करता है

 

जब बला आये तो अमीरे शहर,

कुछ गरीबों को ढाल करता है

4 Comments

  1. kshipra786 says:

    ghajalon ki sunder is duniyaan ko,
    aapka ek-ek sher nihaal karta hai.
    khoobsurat.

  2. sushil sarna says:

    laaaaaaaaaaaaaaaaaaajwaaaaaab-aapkee kalamgiri ko slaam Singh saahib

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