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=== सियासत से सावधान========

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Hindi Poetry

=== सियासत से सावधान========

कोई करता सियासत दो कौम लड़ा के
नफरत कोई पैदा करे दलित-सवर्ण बता के
कोई राम-रहीम भीत लगा, करता है सियासत
कोई चाहता है अपने वंशज की रियासत
कोई पहन के टोपी धवल , यहाँ ढोंग रचाता
कोई तिलक लगाके यहाँ पाखंड दिखाता
परवाह नहीं किसी को इस देश की भाई
ये कैसी दशा देश की देखन को है आयी
सोचते हैं हम सभी ,चुपचाप सह रहे
हालत से हैं चिंतित ,इक दूजे से कह रहे
हाथ में है ताक़त और वोट की शक्ति
ठान लो तो मिल भी जाएँ, इन हालात से मुक्ति
उठो देशवासियों हालात को बदलो
परिवारवाद,जातिवाद के जंजाल से निकलो
सांप्रदायिकता के नाम पे ना बनो हिन्दू-मुसल्मां
दलित-सवर्ण पे क्यूँ लड़े ,मिल जोड़े हिन्दुस्तां
मुस्लिम है न गैर कोई,ना हिन्दू ही है अपना
भारत मेरा ,मैं भारत का,हर देशवासी का हो सपना

2 Comments

  1. Dr. Paliwal says:

    bahut sahi hai sir…
    Jai Hind!

  2. Vishvnand says:

    Sahii saty aur sundar
    abtak to ye bhrasht raajniiti kar janataa ko hii banaaye jaa rahe the bandar
    Shaayad agale chunaav me kuch sudhare aur janataa kare inkaa chhuumantar…!

    Prabhaavii arthpoorn aur sundar rachanaa ke liye hardik abhivaadan

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