« »

इस नए साल

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

हलचल हलचल कल कल कल कल
लहरों सा उठता बवंडर
ऊपर नीचे, अन्दर बाहर
डुबकियाँ लगाता दिन दिन क्षण क्षण
मन यह मेरा
हर दिन, हर पल|

सुख में भी यह ढूँढ रहा
दुःख में भी टटोल रहा
जाने क्या-क्या पाना चाहे
चंचल,उत्तेजित हो रहा|

चाहूँ मैं साथ बनी रहूँ
वक्त न देता साथ, क्या कहूँ,
कुछ इधर करूँ कुछ उधर करूँ
बस तिथियाँ यूँही बदलती रहूँ|

नव वर्ष है अब आ रहा
निश्चय ही निश्चय करूँगी मैं
क़रीब रहूँ, अपनाऊं मैं
अपनों को दूर् न करूँ मैं
मुस्कुराहटे बिखरै,
कहकहे छलके
शिकायतों के गिर्द न रहूँ मैं|

खूबसूरत हो यह नया साल
सब हों हरदम साथ
खुशिओ को दूर् न पायै कभी
आप सब पर उसका रहे हाथ!!

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    Sundar rachanaa
    Bahut jachiin manbhaavan abhivyktiyaan aur s-hraday manokaamnaayen

    Hearty commends …!

  2. dr.paliwal says:

    Bahut sundar, saral shabdon me man ki bhavnao ko piroya hai aapne…
    bahut achchi lagi….

  3. naya saal shubh ho ,achchi kavita hai

Leave a Reply