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धीरे धीरे निजाम बदलेगा

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Hindi Poetry

दुनियां भर मे लोकतँत्र नेतृत्व के खराब प्रर्दशन के कारण
विश्वसनीयता की कसौटी पर है जनता बार बार सरकारे बदलती है पर
परिवर्तन नही हो पाता है .आशाओं को सृजित करना जरूरी है ,मेरी यह नज्म लोकतंत्र
के लिये सादर समर्पित है …..कमलेश कुमार दीवान

धीरे धीरे निजाम बदलेगा

धीरे धीरे निजाम बदलेगा
खास बदलेगा आम बदलेगा
होते होते तमाम बदलेगा ।
धीरे धीरे निजाम बदलेगा ।

जो कश्तियाँ फिर समुंदर की ओर आई है
जो करते रहते काफिलों की रहनुमाई है
बदल रही है फिजाएँ तो ढल रहे मौसम
उठाये रख्खो ये परचम मुकाम बदलेगा ।
धीरे धीरे पैगाम बदलेगा ।
धीरे धीरे निजाम बदलेगा ।

अभी हवाये न जाने क्या रुख ,अख्तियार करे
निकल पड़े तो कातिल उन्ही पे बार करे
खबर है दुश्मनो को बन रही है बारूदें
चलेगी गोलियाँ जो दोस्तो पे बार करे ।
बनाये रखोगे दम खम तो काम बदलेगा
धीरे धीरे निजाम बदलेगा ।

आज है कल वही नही रहता
जिन्दादिल जुल्म यूँ नही सहता
जो किया करते है बदनाम बस्तियो को सदा
जरा सा ठहरो उनका भी नाम बदलेगा ।

अमन की राह मे चलते रहो, चलते ही रहो
धीरे धीरे पयाम बदलेगा
गोया किस्सा तमाम बदलेगा ।

खास बदलेगा आम बदलेगा
होते होते तमाम बदलेगा ।
धीरे धीरे निजाम बदलेगा ।

कमलेश कुमार दीवान
18/08/2013

2 Comments

  1. s n singh says:

    achchhi kavita me lay bhang aap jaise kavi se hone kee ummeed n thi,
    धीरे धीरे पैगाम बदलेगा ।
    धीरे धीरे निजाम बदलेगा kya ye dono ek hi vazan me hain, kya samaan maatraa ke chhand hain?

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