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रुको भी चैन से दो पल निहार लेने दो

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Hindi Poetry

रुको भी चैन से दो पल निहार लेने दो
नसीब प्यार का हमको सँवार लेने दो

नशा नज़र का तुम्हारी अभी तो ताऱी है
ठहर भी जाओ ज़रा ये उतार लेने दो

भटक रहा हूँ अभी मै वफ़ा की राहों मे
किसी मुकाम से खुद को पुकार लेने दो

लबों से शाखों को छू लो तो खिल उठें कलियाँ
ज़रा बहार पे आ तो बहार लेने दो

करो भी छाँव अता हमको अपनी ज़ुल्फ़ों की
सुकूं से पाँव यहीं पर पसार लेने दो

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