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मोक्ष आँखों में उसकी मिले

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Hindi Poetry

इक बरस और बीता मियॉं
कुछ घड़ा और रीता मियाँ

ज़िन्दगी और क्या चीज़ थी
बस फजीता फजीता मियाँ

शुबहे पाकीज़गी पर उठे
कुछ धँसी और सीता मियाँ

जीने वाले मरें रोज़ ही
मर के हैं कौन जीता मियाँ

सब ज़बानी ज़मा ख़र्च हैं
कब कटा लाल फीता मियाँ

पहले जैकार जम के करी
फिर लगाया पलीता मियाँ

ख़ुदपरस्ती अक़ीदा बना
देख अपना सुभीता मियाँ

मोक्ष आँखों में उसकी मिले
अब पढ़े कौन गीता मियाँ

सुर्ख हों गाल उसके न क्यूँ
खूँ ग़रीबों का पीता मियाँ

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