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याद आता रहा निरदई देर तक

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Hindi Poetry

चांदनी के बहाने कई देर तक
तेरा चरचा चला वाक़ई ढेर तक़

एक अरसा हुआ फूल सूखे हुए
फिर भी खुशबू न उसकी गई देर तक

कुछ था मर्दे मुक़ाबिल मे सबसे जुदा
बात करते रहे मुद्दई देर तक

दिल तेरा कल को हमसे भी भर जायगा
चीज़ रहती न कोई नई देर तक

क्या करूँ वो भुला कर चला भी गया
याद आता रहा निरदई देर तक

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    vaah vaah, bahut badhiyaa….
    Jo samjhaaii baaten hain is nazm ne
    man mein mandaraa rahiin hain badii der tak….!

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