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क्रोध मन से बिसारिये बाबा

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Hindi Poetry

दिल को ऐसे न मारिये बाबा
वक़्त से यूँ न हारिये बाबा
रात आई तो दिन भी निकलेगा
खुद को क्यों दे सज़ा रिये बाबा
क्या मिलेगा लड़ा के आँखों को
काहे झगड़ा बढ़ा रिये बाबा
एक ही बात सौ तरह कह के
काहे भेजा पका रिये बाबा
आप दुनिया सुधारने आये
पहले ख़ुद को सुधारिये बाबा
जान पिद्दी सी रोब परबत सा
खाली पीली जमा रिये बाबा
पाँव रक्खे न खुद कभी जिस पर
हमको रस्ता बता रिये बाबा
क्रोध में बोध कुछ नहीं रहता
क्रोध मन से बिसारिये बाबा
आप टीवी के योद्धा ठहरे
आदतन बड़बड़ा रिये बाबा
साईं राजा है दिल के भक्तों के
अपनी गद्दी सम्हारिये बाबा
हमने ऐसी न कोई बात कही
बेवजह तमतमा रिये बाबा

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Vaah vaah, Badii mazedaar rachanaa
    Padhkar ham khushii se muskuraariye baabaa ….!

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