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बड़े लोग, उनके बड़े मामले थे

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Hindi Poetry

दिलासे सब उनके बहुत खोखले थे।
हम इससे तो पहले ही ज़्यादा भले थे।

वहाँ जाल फैले हुए जा ब जा थे
जो थे ऊंचे क़द उनके फँसते गले थे।

न अपनी सी अदना सी चोरी चकारी
बड़े लोग, उनके बड़े मामले थे।

न जाने था माहौल क्यूँकर अँधेरा
कि मजलिस में हरसू दिए तो जले थे।

हिमालय की मानिंद थे देखने में
मगर गोल पेंदे सभी के तले थे।

नमक मिर्च खबरों में ताज़ी मिले थे
सब इस हाथ दे और उस हाथ ले थे।

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