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दूर हो के भी ….***

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Hindi Poetry

दूर हो के भी ….

दूर हो के भी वो दिल के आज कितने पास है
दिल में उसके अक्स का इक हसीं एहसास है 
साथ चरागों के .तड़पता हूँ मैं तन्हा रात भर 
उसकी आँखों में भी मेरी यादों की बरसात है

सुशील सरना

4 Comments

  1. Swapnesh Tiwari says:

    pyaari kavita!

  2. sushil sarna says:

    thanks for ur sweet commenn aadrneey Swapnesh Tiwari jee

  3. Vishvnand says:

    वाह वाह, क्या बात है…
    क्या दूर रहने में पास रहने से भी ज्यादा मिठास है? 😉

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