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प्यासी देह …..

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Hindi Poetry

प्यासी देह …..

मन की कंदराओं में किसने …….
अभिलाषाओं को स्वर दे डाले …….
किसकी सुधि ने रक्ताभ अधरों को ……
प्रणय कंपन के सुर दे डाले//

मधुर पलों का मुख मंडल पर ……..
मधुर स्पंदन होने लगा ………
मधुर पलों के सुधीपाश में ……..
मन चन्दन वन होने लगा//

नयन घटों के जल पर किसकी …….
स्मृति से हलचल होने लगी ……..
भाव समर्पण का लेकर काया …….
मधु क्षणों में खोने लगी//

किसको छूकर हृदय द्वार पर …….
पवन ने दस्तक दे डाली ……
नृत्य भाव में मग्न हो गयी ……
प्यासी देह की हर डाली//

सुशील सरना

4 Comments

  1. rajendra sharma says:

    बहुत सुन्दर

  2. sushil sarna says:

    thanks for ur sweet comment aadrneey Rajendra Sharma jee

  3. Vishvnand says:

    Sundar rachanaa,
    manbhaavan ….!

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