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बसंत गीत

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Hindi Poetry, Uncategorized

बसंत का आगमन और निर्गमन दोनो ही महत्वपूर्ण है ।बसंत धरा का सोन्दर्य है तब उस का अंत संकेतक भी है ।
मे बसंत को कुछ अलग तरह से आत्मसात् करता हूँ बर्षो पहले लिखा मेरा यह गीत है ….देखे .

बसंत गीत
मुझसे बसंत के
गीत नही
गाये जाते ओ वन ।
मुझसे अनंत से
गीत नही
गाये जाते
ओ मन ।

कुछ देर डालियों
पर ठहरो
पाती पर नाम लिखूँगा
अजनबी हवाओं
सखा साथियों
के तन मन पैठूगाँ ।
धूँ धूँ जल रहे पहाड़
और भाये भरमाये मन
मूझसे इस अंत के
गीत नही गाये जाते
ओ मन
मुझसे बसंत के
गीत नही गाये जाते
ओ वन ।

कमलेश कुमार दीवान
लेखक
12/2/2016
kamleshkumardiwan.blogspot.com
kamleshkumardiwan.youtube.com

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